| Management number | 237241818 | Release Date | 2026/07/10 | List Price | US$90.00 | Model Number | 237241818 | ||
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वीरता के बारे में लिखने के लिये अतिआवश्यक है, स्वयं वीर होना! बिल्कुल उसी प्रकार इस साहित्य को समझने के लिये भी वीर होना बहुत जरुरी है।यह कविताएं मुख्य रूप से वीरता व साहसीकता जैसे विषयों पर लिखी गई है। इसके अलावा सफर-यात्रा और कुछ किस्सों कथाओं के विषयों को छूने का भी प्रयास किया गया है। आज जब प्रेम कविताएँ सुनते है तो लगता है की इनमें से कुछ कविताएँ तो बस हारे हूए हताश नायक- नायिकाओं को ही निरुपीत करती है। माना की ‘समर्पण’ भी किसी कायर का काम नही है परंतु क्या हमारे युवा ‘निर्माल्य भयगान’ को ही समर्पण का रुप दे कर आत्मप्रशंसा कर लेंगे? एक वीर का प्रेमगीत कैसा होना चाहिए इस विषय को भी आवरित करना उचित समझा है। हमारे गीत, हमारी कविताएँ ऐसी क्यों न हो जिन्हें पढ कर पाठक उठ चले और दौड पडे? क्या दिनकर जी और हरिवंशराय बच्चन जी जैसे गुरुजनों ने हमें यह दीक्षा नही दी है? जब पियूष मिश्र या प्रशून जोशी की कुछ वीर रस भर कविताएँ पढता हूं तो मन को तस्सली मिलती है की हिन्दी अभी भी वीरों की भाषा है! यह कविताएँ वीर रस को युवा मन में ओर ज्यादा घोलने का मेरा प्रयास है। Read more
| ASIN | B07RGRMV6L |
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| Edition | 1st |
| Language | Hindi |
| File size | 664 KB |
| Page Flip | Enabled |
| Publisher | 978-1-64546-978-0 |
| Word Wise | Not Enabled |
| Print length | 59 pages |
| Accessibility | Learn more |
| Screen Reader | Supported |
| Publication date | May 6, 2019 |
| Enhanced typesetting | Enabled |
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